विशिष्ट पोस्ट

एक और षडयन्त्र

अनंत_वासुदेव_मंदिर भूवनेश्वर कि सर्वप्रथम पुरातन विष्णु मंदिर है ।पुरातन काल मे भूवनेश्वर को शैव क्षेत्र के रुप मे जानाजाता था यहाँ कई प...

जीवनशैली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जीवनशैली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

उत्कल एक व्याख्या

यूं तो बर्तमान
ओडिशा का सबसे प्राचीन व लोकप्रिय नाम
हे कलिंग जो कि उससमय इतना प्रशिद्ध हुआ कि बादमें चीन से लेकर के मलेशिया इंडोनेशिया आदि क्षेत्रों में भारतीयों के क्लेंग,क्लिगं  तथा किल्गीं आदि नाम प्रचलित हो गया किंतु
बर्तमान ओडिशा का आधिकारिक नामों में से
एक उत्कळ भी कम् लोकप्रिय नहीं है...

आम तौर पर कहाजाता है कि
उत्+कळ=उत्कळ (ଉତ୍କଳ)

उत् (उ+क्विप्) एक उपसर्ग है
ओर उसके कई अर्थ है
जैसे :--उर्द्ध या उचांई में,सम्यक रुप से,इतःस्ततः,उच्चैस्वर में,उत्कट, उलटा,उत्कर्ष, समुचय,प्रश्न, वितर्क,अधिक आदि.....

वहीं कळ/कल शब्द एक धातु शब्द है
जो कि तीन मूल अर्थों में प्रयोग किया जाता है
1.गमन करना
2.गणना करना
3.शब्द करना
(ओडिआ भाषा में यन्त्र को ‛कळ’ भी कहाजाता है च्यूंकि उपरोक्त गुण उसमें पाये जाते है)

इसके अलवा कळ शब्द का एक विशिष्ट शब्द के रुप में भी बहुत से अर्थ होते है
जैसे कि..
୧.अत्यन्त मधुर ध्वनी(कल कल)
୨.भ्रमरों का गुंजन
୩.शाल वृक्ष
୪.शुक्र
୫.अंकुर
୬.अजीर्ण
୭.यन्त्र, कौशल
୮.सुविधा
୯.कन्दर
୧୧.वश्यता,अधीनता
୧୨.अधिकता
୧୩.मौका

ओर अब यदि इन सारे अर्थों को मिलाकर व्याख्या करें तो
कैसा होगा चलिए देखते है.......

1.जिस क्षेत्र के अधिवासी सदा उर्द्ध कि ओर गति करते है यानी जिनके मनमें
जाति धर्म के नाम पर
हीनता नहीं होता.....

2.जिस जाति कि गणना समस्त भारतीय जातिओं में आगे हुआ करता है(था)
यथा जो देश भारतवर्ष में उर्द्ध पर है अर्थात भूस्वर्ग है..

3.जिस भूभाग के अधिवासीओं के गर्जना(शब्द करना) मात्र से ही शत्रु उलटे पांव पलायन कर देता है

.......

1.जिस भूमि के अधिवासी सम्यक रुपसे
मधुरभाषी तथा साधु स्वभाव के होते है
वे अकारण किसी से वैर नहीं रखते ....

2.जो देश स्वर्ग सम उत्कर्ष है अतः वहां के नंदनकानन समान उपवनों में
भ्रमरें सदा कल कल गुंजन करते पाये जाते है...

3.जो देश  वहुधा शाल आदि
मजबूत वृक्षों के परिपूर्ण है तथा प्राकृतिक शोभा युक्त सौंदर्य शालिनी है ।

4.जिस देश की प्रशिद्धि शुक्र ग्रह समान
जाज्वल्यमान है ।

5.जिस उत्कर्ष कलाओं के देश में बौद्ध, जैन तथा महिमा धर्म से लेकर ओडिशी,छउ नृत्य स
आदि विभिन्न कलाओं का अकुंरोद्गम् हुआ है ।

6.जो देश व उसके अधिवासी उत्कट भीषण शत्रु के लिए भी अजीर्ण हो.....
ये वही जाति है कि शत्रु भी जीत न सका तो कलिगां साहासीका लिखकर चलता बना था......

୭.जो देश यन्त्र कौशालादि के लिए लोकप्रिय हो..

୮. जिस देश में जीवनयापन कै लिए सर्वाधिक सुविधा प्रकृति से मिला हुआ है ।अनेकानेक नदनदी,ह्रद,पर्वत तथा उपत्याकाओं से सजा जो देश स्वर्ग सम सुंदर हो.....

୯.जिस देश के अधिवासी
नीलकंदर निवासी श्रीजगन्नाथ महाप्रभु के प्रति निष्ठावान तथा श्रीजगन्नाथ जिनके राजराजेश्वर है  ....जिस देश में जाति धर्म का भेद न हो कोई किसीके अधीन न हो वो उत्कळ है...

୧୦.भ्रांत प्रश्नकारी वितर्क प्रेमी अन्य भारतीय जाति भी जिस भूमि के महानता के आगे नतमस्तक हो गये थे ।
कभी इस जातिको म्लेंच्छ कहके अपमानित करनेवाले भी समय के साथ इस उत्कल देश के अधिवासीओं के पुरुषार्थ देखके अपने वाक्य लौटाने को वाध्य हो गये थे ।
आगंगा गोदावरी समस्त पूर्व भारत जिस देश के महान सनातनी जगन्नाथ धर्म से प्रभावित है
यह है वह देश उत्कल ..

.............

ओडिआ साहित्य में उत्कल शब्द कई अर्थों
में प्रयोग होता है
1.उत्कण्ठित-- ज्ञान तथा कला के लिए जो उत्कंठित

୨.शिकारी,व्याध - शत्रुओं के शिकार में शिद्धहस्थ

୩.कर्कष गर्जना - शेर ही करते है भीरू नहीं ....

୪.बंगाली विश्वकोष लेखक उत्कल शब्द का एक अर्थ भारवाहक लिखें है..
अठारहवीं सदी से बीसवीं सदी तक कई ओडिआ बंगाल में भारवाहक का काम किया करते थे,माली हुआ करते थे,पाचक(रसौया) हुआ करते थे तो यह अर्थ बनाया गया ।
खैर हम वह भारवाहक अर्थ को भी सादर ग्रहण पूर्वक अपना सीना तानकर कहते है कि हाँ
हम वही भारवाहक उत्कलीय जाति है जिसने
भारतीय संस्कृती तथा भाषाको को अपने बोइत या बहीत्र में लादकर
इंडोनेशिया, मालेशिया,फिलपिन्स,कोरिया,मोरेसियस, चीन,जापान,श्रीलंका व मालडीव्स से लेकर माडागास्कर,एथिओपिया आदि देशों तक पहुंचाया......

#बंदेउत्कलजननी
#जयकलिगोंत्कल

शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

छोटे छोटे जीवों को भी मिलता है ओडिआ भाषा में इज्जत

ओडिआ भाषामें सजीव जीवों को इज़्ज़त मिलता है
वो भी वाक्य गठन से ....

हिंदी में आप #घरों कहते है
इंसानों के लिए #लोगों  कहते है
लेकिन ओडिआ में सजीव ओर निर्जीव जीवों के लिए अलग-अलग​ suffix यानी अंतसर्ग/प्रत्यय व्यवहार होता है
जैसे घरों के लिए =>#घरगुडि़क
लेकिन जब इंसान कि बात आती है तो हम कहते है =>#लोकमाने

यहां #गुडिक ओर #माने दोनों का इस्तेमाल एक ही अर्थ के लिए प्रयोग होता है
लेकिन सजीव तथा निर्जीव के लिए भिन्न-भिन्न
Suffix है ओडिआ में....
अंग्रेजी यहां तक कि दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी जीवित प्राणी तथा निर्जीव वस्तुओं में इस तरह के प्रत्ययभेद नहीं है......

यहां तक कि छोटे छोटे चिटीओं तक को भी इज्जत मिलती है ओडिआ भाषा में
(चिटीको ओडिआ में पिंपुडि कहते है)
लोग कहते है #पिम्पुडिमाने......

ओर जड वस्तुओं के लिए
गुडिक जैसे ओर भी कई suffix word ओडिआ में प्रचलन में है जैसे
#से_गुडा
#हे_गुडा
#से_गा

सजीव जीवों के लिए suffix word
#माने प्रयोग होता है

गुरुवार, 22 जून 2017

ओडिआभाषा में संयुक्ताक्षर

कल #मैथिली भाषा के बारे में एक किताब में पढरहा था ओर यहां काहागया है कि सिर्फ मैथिली में ही संयुक्ताक्षर होते है अन्य भाषाओं में नहीं तो मैं कहता हुं यह मात्र भ्रम है ऐसी गलतफैमी में ना रहें....

जहां तक ओडिआभाषा कि बात है यहां बहुतसे ऐसे युक्ताक्षर/संयुक्ताक्षर है जिससे किसी अन्य भाषाभाषी व्यक्ति को यह भाषा सिखने में मुस्किलें होती है....
पैस है ऐसे ही कुछ ओडिआ संयुक्ताक्षर....

କ୍ଷ,କ୍ତ,କ୍ର,କ୍ସ,ଖ୍ୟ,ଚ୍ଛ,ଙ୍କ,ଙ୍ଗ,ତ୍ସ,ଦ୍ଦ,ନ୍ତ,ତ୍କ,ତ୍ତ,ଦ୍ଵ,ନ୍ଦ,ନ୍ମ,ବ୍ଲ,ନ୍ନ,ଦ୍ଧ,ତ୍ବ,ଞ୍ଜ,ଞ୍ଚ,ଜ୍ଞ,ବ୍ର,ନ୍ଧ,ତ୍ମ,ଣ୍ଟ,ଣ୍ଡ,ଟ୍ର,ଟ୍ଟ,ନ୍ତ୍ର,ର୍ଣ୍ଣ,ସ୍କ,ୱ,ସ୍ପ,ସ୍ଵ,ମ୍ପ,ମ୍ଭ,ମ୍ମ,ମ୍ଲ,ଶ୍ଚ,ଶ୍ଵ,ସ୍ଥ,ଷ୍ଣ,ଷ୍ଟ୍ର,ଷ୍ଠ,ଷ୍ଟ,ର୍ଦ୍ଧ,ଳ୍ପ,ର୍ଯ୍ୟ आदि आदि....
इसके अलावा कुछ अतिप्राचीन संयुक्ताक्षर भी हुआ करता था जैसे ऐकंत्र ଙ୍କ୍ତ,ଙ୍କ୍ଏ आदि
वैदिक भाषामें चुहों के एक प्रजाति को
'ପାଙ୍କ୍ତ୍ର' (पाङ्क्त) कहाजाता था जो प्राचीन ओडिआ ग्रंथों मे मिलजाता है ।
हालांकि ऐङ्कत्र शब्द संस्कृत में भी बिरल ही मिलता है......
(कुछ तथ्य odia classical languagge group से लियागया है)

गुरुवार, 27 अगस्त 2015

ओड़िशा के ढ़ेकाँनाल क्षेत्र मेँ "चषा" जाति व अन्य जातिओँ पर सम्यक जानकारी

ओड़िशा मेँ खेति करने वाले लोगोँ को आम बोलचाल मेँ "चषा" कहाजाता है ।
मेरे ढ़ेँकानाल मेँ प्रायः चार प्रकार के #चषा बताये जाते है

1.Khandayat Chasa

सैनिक किसान जो अब तलवार छोड़ चुके है खेती करते है


2.Pandarasariya-
साधारण खेती करनेवाले
वैश्य कुल

3.kalatuaa chasaa_

साधव -पुरातन व्यापारी कुल

4.thuriya chasa
साधारण किसान वैश्य कुल

इसके अलावा
यहाँ "Halua bramhan"
ब्राह्मण कुल भी पाया जाता है
जो खेती व साहुकारी करते है

#Dhenkanal जिल्ला मेँ Baulpuriya chasa नामसे

एक स्वतंत्र कृषक कुल भी पायाजाता है
जिसे कुछ लोग Khandayat के समकक्ष मानते है ।

कृषकोँ कि इन अलग अलग उपजातिओँ मेँ पारस्पारिक विवाह संबन्ध वर्जित
है फिर भी यदि कोई शादी करना चाहे तो समाज बिठाकर
कर सकता है ।

मेरा गाँव KANTIO मेँ कुल 36 जाति के लोग रहते है जिसमेँ 40% Khandayat है
खंडायत सरनामोँ मेँ
#JENA
#BISWAL
#SAHOO
#PARIDA
#PRADHAN
#RAUT
आदि मुख्यतः पायेजाते है ।

मेरे गाँव के आसपास Putasahi ,महिमाक्षेत्र jaka , Khuntabati ,kantio kateni , tumisinga आदि गाँव के लोगोँ को Kalatuaa Chasa कहाजाता है ।

आज से करिबन 1500वर्ष पूर्व
साहु Titel धारी ज्यादातर लोगोँ के पूर्वज #साधव कहलाते थे.....

1000 वर्ष पहले तक Odisha का पिपिलि चित्रोत्पला आदि वंदरगाहोँ से
मलेसिया .इंडोनेसिया ,मिशर व युरोप के साथ व्यापारीक संपर्क कायम था ।
धीरे धीरे ओड़िआ लोग जैन ,वौद व शैव धर्म छोड़ वैष्णव होने लगे....व्यापार छोड़ खेती करने पर ज्यादा तबज्जो देने लगे ,
Odisha मेँ जातिप्रथा वैष्णवोँ कि देन है । यदि ओड़िशा मेँ वैष्णव धर्म स्थापना न होता तो शायद आज ज्यादातर ओड़िआ
अन्य धर्म ग्रहण कर चुके होते ।
ओड़िशा मेँ वैश्णव धर्म के प्रचारकोँ मेँ श्री चैतन्य प्रधान मानेजाते है ।
उनका

"Bhaja shri krushna chaitanya prabhu nityananda japa hare krushna hare ram shriram gobinda"

महामन्त्र आज भी भजन किर्तनोँ मेँ गयाजाता है
वैष्णवोँ ने यहाँ ब्राह्मण व क्षत्रिय शासन (स्वायत्त गाँव) भी वसाया था ।

कुल मिलाकर
पहले ओड़िआ लोग किसान ,सैनिक साधव व नाविक हुआ करते थे
वैष्णवोँ ने जातपात को बढ़ावा दिया परंतु
आदिवासी भगवन को पूजने वाले ओड़िआओँ ने सर्वदा जातपात से ज्यादा मानव धर्म को तबज्जो दिया

यही कारण था कि यहाँ
उतना धर्मान्तरण नहीँ हो सका जितना शेष भारत मेँ हुआ था ।

[[आगे बताउगाँ कैसे वैष्णवोँ ने
एक आदिवासी भगवान जगन्नाथ को वैष्णव बनाने कि गहरी चाल चली
और 16वीँ सदी तक सफल भी हुए । ]]

बुधवार, 12 अगस्त 2015

ओड़िशा और आदिवासी संस्कृति

ओड़िशा एक नहीँ तिन संस्कृतिओँ की मिलनस्थली है
1.आदिवासी
2.द्राविड
3.आर्य
आदिवासी इस क्षेत्र की मूल निवासी है फिर यहाँ द्राविड़ोँ का आगमन हुआ और अन्त मेँ आर्योँ ने इस क्षेत्र मेँ आकर आपसी एकता कायम करवाया ।
इसलिये पंडित नीलकंठ दासजी से लेकर के जर्मन विद्वान हर्मन् कुलके तक सभी ने यही मत दिया कि बर्तमान ओड़िआ संस्कृति आदीवासी संस्कृति से प्रभावित था ।
नीलकंठ जी ने तो यहाँतक कहा है "ओड़िआ भाषा मेँ आर्य है परंतु इनकी संस्कृति सर्वथा द्राविड़ रही है " !!!
इन तिनोँ संस्कृति के समन्वय को तथा जैन ,बौध ,वैदिक धर्म के एकीकृत अवस्था को जगन्नाथ संस्कृति कहाजाता है ।
जगन्नाथ शवरजाति के आदि परमेश्वर हे जिन्हे बादमेँ सभी पंथ के विद्वानोँ ने अपनाया । उन महाप्रभु के प्रथम पूजक आदिवासीओँ का ओड़िशा मेँ 62 जाति पायीजाती है
जिनकी जनसंख्या राज्य कि कुल जनसंख्या की 24% हे ।
इनमे शवर ,मुण्डा ,कोल्ह ,सान्ताळ और भील जातिओँ के बारे मेँ पौराणिक ग्रंथो मेँ बताया गया है ।
ओड़िशा मेँ रहनेवाले आदिवासीओँ का अपना 36 स्वतंत्र उपभाषा हे !! इसमेँ सबसे ज्यादा वोलीजानेवाली भाषाओँ मेँ देशीआ/Kotia ,साद्री और सान्ताली प्रमुख है ।
आदिवासी संस्कृति उत्कलीय संस्कृति कि प्राणकेन्द्र है आर्य सभ्यता अंगप्रत्यगं व द्राविड
सभ्यता रक्त हे ।
मुझे गर्व है मेँ एक ऐसे क्षेत्र मेँ निवाश करता हुँ जहाँ जातपात के नाम पर उत्तरभारतीयोँ कि तरह आपसी भेदभावमेँ नहीँ जिया करते ।
ओड़िशा के वाहार कोई मुझे यदि आदिवासी कहता हे तु मेँ इसे अपनी तारिफ समझता हुँ और उस व्यक्ति छोटी सोच पर मुझे अफसोस भी होता है ।
मानव मात्र मेँ प्रेम को गुरुत्व देनेवाले भोलेभाले प्रकृतिप्रेमी आदिवासीओँ का तो पुराणोँ मेँ भी गौरव बढ़ाया गया है !!!!